Saturday, August 11, 2012

फिर भी समझ नहीं आता क्या मेरी गलती है या उसकी



फक्र है इस बात का की उसने इतनी खुशियाँ  दी है
जरुरत थी जब मुझे हमेसा उसने साथ दी है
फिर भी समझ नहीं आता क्या मेरी गलती है या उसकी
लेकिन ये बात भी सच है की उसने भी मोहब्बत की है

दुनिया में बहुत दोस्त बनते हैं लेकिन
तुझसा कोई न बना अब तक,इसका मतलब ये नहीं
की वो  क्या थी और क्या है अब
फिर भी समझ नहीं आता क्या मेरी गलती है या उसकी

इन्तेजार किया बहुत किया
झूठ का भी सहारा लिया
लेकिन फिर भी नहीं बन पाया उसके लिए वो
फिर भी समझ नहीं आता क्या मेरी गलती है या उसकी

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